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प्रेगनेंसी के दौरान पीठ में दर्द का इलाज

Care during Pregnancy (गर्भावस्था)

shubhra singh

Upvotes : Sumit Srivastava,Richi Sarwahi,

Source : Dr. Bhandari

गर्भावस्था के दौरान हर गर्भवती महिला को पीठ के दर्द से जूझना ही पड़ता है। उनका शरीर अपने अंदर एक शिशु को लिए होता है जिसके भार से उन्हें यह दर्द झेलना पड़ता है। दर्द होने का मात्र यही कारण नहीं है बल्कि महिला के अंदर हर समय हो रहे हार्मोन में बदलाव भी दर्द का कारण बनते हैं।
गर्भवती महिला को इस दौरान क्या सावधानियां रखनी चाहिये जिससे बैक पेन से राहत मिल सके।
कैसे पाएं निजात-
1. पोस्चार बनाएं- शिशु के जन्म के दौरान मां के पेट का भार लगातार नीचे की ओर होता है। इसलिए इस समय मासपेशियों का पर दबाव ज्यादा होता है तभी गर्भवती महिला को अपना पोस्चार हमेशा बनाएं रखना चाहिये। टहलना, सीधे बैठना, पैरा खीचना और नीचे की ओर न झुकना आपकी कमर पर बिल्कुल भी दबाव नहीं डालेगें। दर्द को अगर कम करना है तो रात को सोते समय पीठ के बजाय करवट लेकर ही सोएं।
2. मसाज- इस दौरान अगर पीठ या कमर में दर्द हो रहा हो तो गरम तेल या बाल्मस से मसाज करने से फायदा होता है। तेल शरीर में सर्कुलेशन को तेज़ करता है जिससे मासपेशियों में कोई मोंच और दर्द नहीं होता। एक बात हमेशा ध्यान रखें की जब आपकी डिलीवरी डेट पास में हो तो, न ज्याादा टहलें और ना ही ज्यादा व्यायाम करें। अगर मासपेशियों पर दबाव को कम करना है तो एक्यूपंचर या एक्यूेप्रेशर का सहारा लें।
3. व्यायाम- प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को हल्केू फुल्के व्यायाम करने चाहिये। टहलने और स्ट्रैेचिंग करने से नीचे का शरीर कडा होने से बच जाता है। पर ध्यान रहे की इसे करते वक्त आपके लिगामेंट्स में ज्यादा खिचाव न हो। इस दौरान स्विमिंग एक अच्छा व्यायाम है क्योंकि इससे आपका वजन कम होगा और हाथ-पैर भी स्ट्रैंच होगें। इसके साथ ही योगा भी काफी फायदेमंद होगा।
4. ढीले कपड़े पहने- इस समय हल्केे तथा ढीले-ढाले कपड़े पहनने चाहिये। टाइट कपड़े पहनने से शरीर में खून का दौरा कम होने लगता है और इसी कारण मासपेशियां दर्द होने लगती हैं। इसलिए सूती के आरामदायक कपड़े ही पहनने चाहिये। इसी के साथ हाई हील चप्पलें या जूते भी कमर की मासपेशियों पर असर डालते हैं, जिस कारण दर्द होता है।
5. सोते समय हमेशा अपनी गर्दन के नीचे तकिया लगाएं। अगर बैक पेन हो रहा हो तो गरम पानी की बोतल या बर्फ के पैक से सिकाईं करें। इस दौरान बिल्‍कुल भी झुकना नहीं चाहिये।
-डा. भँडारी, सँगरूर