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हम दीपक क्यों जलाते हैं ?

Hindu Rituals and Routines ( हिंदू रीति-रिवाज एवं दिनचर्या )

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Source : Hindu Rituals and Routines

लगभग हर भारतीय घर में एक दीपक भगवान की वेदी के सामने प्रतिदिन जलाया जाता है। कुछ घरों में यह भोर में और कुछ में दिन में दो बार जलाया जाता है, सुबह और शाम और कुछ घरों में यह लगातार जलाए रखा जाता है - अखंड दीप | सभी शुभ कार्यों की शुरूवात दीपक प्रज्वलन से की जाती है, जो अक्सर अवसर के समाप्ति तक प्रकाशित रखा जाता है |
प्रकाश ज्ञान का प्रतीक है और अंधेरा - अज्ञानता का | भगवान जो "ज्ञान सिद्धांत" (चैतन्य) के स्रोत हैं, वही ज्ञान की सजीव करने वाले प्रकाशक है। इसलिए प्रकाश, स्वयं प्रभु के रूप में पूजा जाता है।
जैसे प्रकाश अंधेरे को हटाता है उसी प्रकार ज्ञान अज्ञानता को | इसके अलावा ज्ञान एक ऐसा स्थायी आंतरिक धन है जिसके द्वारा सभी बाहरी उपलब्धियों को पूरा किया जा सकता है। इसलिए हम ज्ञान को, सभी प्रकार के धन-धान्य से बड़ा मानते हुए, झुक कर, दीपक को प्रकाशित करते हैं |

क्यों ना एक बल्ब, सी एफ एल, ट्यूब लाइट या एल ई डी जला दिया जाये ? वह भी तो अंधेरे को दूर करेगा। लेकिन पारंपरिक तेल के दीपक में एक और आध्यात्मिक महत्व है। दीपक में उपस्थित तेल या घी हमारी वासना या नकारात्मक प्रवृत्तियों और बाती, अहंकार का प्रतीक है। जब आध्यात्मिक ज्ञान से दीपक जलाया जाता है तो वासना धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है और अहंकार का भी अंत होता है | जिस तरह एक दीपक की लौ हमेशा ऊपर की तरफ जलती है, उसी तरह हमें इस तरह के ज्ञान प्राप्त करना जो उच्च आदर्शों की प्राप्ति के लिए हों |
दीपक प्रकाशित करते समय हमें निम्न प्रार्थना करनी चाहिए:

दीपज्योति परब्रह्मा |
दीप सर्व तमोपहाहा ||
दीपेना साध्यते सारं |
संध्या दीपो नमोस्तुते ||

मैं प्रातः एवं सायं के दीपक को साष्टांग प्रणाम करता हूँ, जिसका प्रकाश "ज्ञान सिद्धांत" (सुप्रीम ईश्वर) है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर करता है और जिसके द्वारा जीवन में सभी कुछ प्राप्त किया जा सकता है।